हरतालिका तीज व्रत पूजा विधि :-

व्रत के एक दिन पूर्व स्त्रियां सुबह उठकर बालों से स्नान करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें । व्रत के दिन सुबह उठकर नित्य क्रम से निवृत हो कर स्नान कर लें । दैनिक पूजा करें । पूरे दिन शिव जी का स्मरण करें । तीसरे पहर में पूजा करें । तीसरे पहर के पहले दुबारा स्नान कर नये वस्त्र धारण कर लें । पूजा स्थल पर सभी सामग्री एकत्रित कर लें । आसन पर बैठ जायें।

1. पवित्रीकरण

सर्वप्रथम हाथ में जल लेकर मंत्र के द्वारा अपने ऊपर जल छिड़कें:-
ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।
यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥
इसके पश्चात पूजा कि सामग्री और आसन को भी मंत्र उच्चारण के साथ जल छिड़क कर शुद्ध कर लें:-
पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः
कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

2. आचमन:-

अब आचमन करें
पुष्प से एक - एक करके तीन बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और निम्न मन्त्र बोलिए-
ॐ केशवाय नमः
ॐ नारायणाय नमः
ॐ वासुदेवाय नमः
फिर ॐ हृषिकेशाय नमः कहते हुए हाथों को खोलें और अंगूठे के मूल से होंठों को पोंछकर हाथों को धो लें।
लकड़ी के चौकी या पाटे पर स्वास्तिक बनाये। चौकी के चारों कोने पर केले के पत्ते लगाकर मण्डप तैयार करें । चौकी पर लाल कपड़ा बिछायें । चौकी पर बालू या मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर स्थापित करें । किसी पात्र या थाली में सुपारी को गणेशजी के रूप में स्थापित करें ।

3. गणेश पूजन:-

इसके बाद सबसे पहले गणेश जी का पूजन पंचोपचार विधि (धूप, दीप ,अक्षत, पुष्प एवं नैवेद्य) से करें।
संकल्प:-
हाथ में अक्षत, पान, सुपारी, सिक्के तथा जल लेकर निम्न मंत्र के द्वारा संकल्प् करें:-
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः। श्री मद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्याद्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरेऽष्टाविंशतितमे कलियुगे प्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गतब्रह्मावर्तैकदेशे पुण्यप्रदेशे बौद्धावतारे वर्तमाने यथानामसंवत्सरे अमुकामने महामांगल्यप्रदे मासानाम्‌उत्तमे भाद्रमासे शुक्लपक्षे तृतीयातिथौ अमुकनक्षत्रे (व्रत के दिन, जिस नक्षत्र में सुर्य हो उसका नाम) अमुकराशिस्थिते सूर्ये (व्रत के दिन, जिस राशिमें सुर्य हो उसका नाम) अमुकामुकराशिस्थितेषु (व्रत के दिन, जिस –जिस राशि में चंद्र,मंगल,बुध,गुरु शुक,शनि हो उसका नाम) चन्द्रभौमबुधगुरुशुक्रशनिषु सत्सु शुभे योगे शुभकरणे एवं गुणविशेषणविशिष्टायां शुभ पुण्यतिथौ सकलशास्त्र श्रुति स्मृति पुराणोक्त फलप्राप्तिकामः अमुकगोत्रोत्पन्नः (अपने गोत्र का नाम) अमुक नाम (अपना नाम)  मम हरतालिका व्रत निमित्तक यथाशक्ति जागरण पूर्वक उमामहेश्वर पूजन करिष्ये। सभी सामग्री शिव-पार्वती के पास छोड़ दें ।