संकष्टी चतुर्थी

प्रत्येक मास की संकष्टी चतुर्थी की महत्त्वपूर्ण बातें :-

पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं और अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं। संकष्टी चतुर्थी अगर मंगलवार के दिन पड़ती है तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं और इसे बहुत ही शुभ माना जाता है।


प्रत्येक मास के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि को गणेश जी के पूजन का विधान है। शुक्ल-पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से सभी प्रकार की बाधाओं को दूर कर श्री गणेश जी मनुष्य को हर प्रकार के सुख का आशीर्वाद देते हैं। गणेश जी को विघ्न विनाशक कहा गया है, इसलिए श्री गणेश जी की पूजा से हर विघ्न दूर हो जाते हैं |


List of Sankashti Chaturthi 2023 - वर्ष 2023 के संकष्टी चतुर्थी

यह व्रत माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। Sakath Chauth - 10th January 2023 (Tuesday) सकट चौथ ⇒

फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्थी को “हेरम्ब” गणेश की पूजा होती है। खीर तथा कनेर की फूल को मिला कर गुलबांस की लकड़ी से हवन किया जाता है। पूजा के बाद, ब्राह्मण विष्णु शर्मा की कथा सुने अथवा सुनाये। । व्रती को केवल घी और चीनी हीं ग्रहण करना चाहिये। इस वर्ष फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्थी 09 February 2023 Thursday को है । ⇒

चैत्र कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश जी के “विकट” स्वरूप का पूजन किया जाता है। इस व्रत के में राजा मकरध्वज की कथा कही और सुनी जाती है। इसमें घी और बिजौरे नीबू से हवन किया जाताहै, जिससे नि:संतानों को भी संतान की प्राप्ति होती है। चैत्र कृष्ण पक्ष चतुर्थी “विकट” स्वरूप पूजा ⇒

वैशाख कृष्ण पक्ष चतुर्थी को गणपति के “वक्रतुण्ड” स्वरूप की पूजा करनी चाहिये। इस व्रत में ब्राह्मण धर्मकेतु की कथा को कहने और सुनने का विधान है। इस व्रत में कमलगट्टे के हलवे का भोजन करना चाहिये। वैशाख कृष्ण पक्ष चतुर्थी “वक्रतुण्ड” स्वरूप पूजा ⇒

ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को “आखू (मूषक) रथा” गणेश की पूजा करनी चाहिये। इस व्रत में गणेश जी को हलवा, पूरी, लड्डू आदि का भोग लगाने का विधान है। भोग की सभी सामग्री शुद्ध घी में बने होने चाहिये। इस व्रत में ब्राह्मण दयादेव की कथा कही जाती है। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष चतुर्थी ⇒

आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्थी के गणेश जी का नाम “एकदंत गणेश” है। इस तिथि को पूजन करन के पश्चात राजा महिजित की कथा सुने अथवा सुनाये। व्रत के बाद ब्राह्मणों को वस्त्र दान करें तथा भोजन करायें। आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्थी ⇒

श्रावण कृष्ण पक्ष में गणेश जी का पूजन विधि-विधान से करें। गणेश जी को लड्डु अर्पित करें।प्रात:काल सफेद-तिल मिश्रित जल से स्नान करें। रात्रि को चंद्रमा के पूजन के बाद संतानादि सर्वसिद्धिदायक की कथा कहें अथवा सुने । श्रावण कृष्ण पक्ष चतुर्थी ⇒

इस तिथि को विघ्न विनाशक गणेश्वर नाम से गणेश जी की पूजा करनी चहिये। इससे समस्त सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं और नित्य ही शान्ति, पुष्टि, सुख, सन्तान एवं धन की वृद्धि होती है। अधिक मास की संकष्टी चतुर्थी ⇒

भाद्र कृष्ण पक्ष में “एकदंत” स्वरूप की पूजा की जाती है। है। यह संकटनाशक चतुर्थे के नाम से जाना जाता है। इस व्रत में राजा नल की कथा कही और सुनी जाती है। भाद्र कृष्ण पक्ष :(बहुला संकष्टी चतुर्थी) ⇒

आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्थी को “कृष्ण” नामक गणेश जी की पूजा होती है। हल्दी और दूब से हवन किया जाता है। इसे संकटा चतुर्थी भी कहते हैं। पूजन के बाद कृष्ण-बाणासुर की कथा कहने चाहिये। इस व्रत में केवल फलों का सेवन करें आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्थी ⇒

करवा चौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की लम्बी उम्र के लिये करती हैं। करवा चौथ व्रत विधि एवं कथा ⇒

मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण पक्ष चतुर्थी “गजानन ” स्वरूप को समर्पित है। पूजा तथा अर्घ्य के बाद ब्रह्मण को भोजन करायें। तत्पश्चात जौ, चावल, चीनी, तिल व घी मिलाकर हवन करें तथा राजा दशरथ की कथा कहे अथवा पढ़े मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण पक्ष ⇒

मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण पक्ष चतुर्थी “गजानन ” स्वरूप को समर्पित है। पूजा तथा अर्घ्य के बाद ब्रह्मण को भोजन करायें। तत्पश्चात जौ, चावल, चीनी, तिल व घी मिलाकर हवन करें तथा राजा दशरथ की कथा कहे अथवा पढ़े मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण पक्ष ⇒