जया एकादशी व्रत विधि एवं कथा - Jaya Ekadashi Vrat Vidhi and Katha in Hindi

माघ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते हैं। यह व्रत इस वर्ष, २०२० में ५ फरवरी (बुधवार) [ 05 February 2020 (Wednesday) ] को है। यह व्रत सभी पापों का विनाश करनेवाली होती है।

जया एकादशी व्रत महात्म्य:- (Importance of Jaya Ekadashi)

माघ मास के शुक्लपक्ष की जया एकादशी सभी पापों को हरने वाली और उतम कही गई है। पवित्र होने के साथ-साथ यह सभी पापों का नाश करती है। इस एकादशी के व्रत से मनुष्य के ब्रह्म-हत्या का पाप भी दूर हो जाता है तथा इस व्रत के प्रभाव से भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस एकादशी के प्रभाव से पिशाच योनी से भी मुक्ति मिल जाती है।

जया एकादशी व्रत पूजन सामग्री:- (Puja Saamagree for Jaya Ekadashi Vrat)

∗ श्री विष्णु जी की मूर्ति
∗ पुष्प
∗ पुष्पमाला
∗ नारियल
∗ सुपारी
∗ अनार,
∗ आँवला,
∗ लौंग
∗ बेर
∗ अन्य ऋतुफल
∗ धूप
∗ दीप
∗ घी
∗ पंचामृत (दूध(कच्चा दूध),दही,घी,शहद और शक्कर का मिश्रण)
∗ अक्षत
∗ तुलसी दल
∗ चंदन- लाल
∗ मिष्ठान

जया एकादशी व्रत की विधि (Puja Method Of jaya Ekadashi)

इस व्रत को करने के लिये भक्तों को एक दिन पूर्व यानी दशमी तिथि को सात्विक भोजन करना चाहिये। भक्तजन प्रात:काल उठकर नित्यक्रम से निवृत होकर पूजा करें। उसके बाद हीं भोजन ग्रहण करें। भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिये। भोजन में लहसुन,प्याज आदि प्रयोग ना करें। रात्रि को एक हीं बार भोजन करें। अब एकादशी तिथि को सुबह उठकर अपने नित्य कार्यों से निवृत हो जायें।स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा गृह अथवा पूजा स्थल को शुद्ध कर लें। सभी पूजन सामग्री इकट्ठा कर लें। व्रत का संकल्प करें। अब श्रीविष्णु भगवान की पूजा करें। धूप-दीप अर्पित कर भोग लगायें। भगवान का स्मरण करके बारम्बार श्रीकृष्ण नाम का उच्चारण करते हुए कुम्हड़े, नारियल अथवा बिजौरे के फले से भगवान को विधिपूर्वक पूजकर अर्घ्य दें। अन्य सामग्रियों के अभाव में सौ सुपारियों के द्वारा भी पूजन और अर्घ्यदान किये जा सकते हैं। जया एकादशी की कथा सुने अथवा सुनायें। कथा सम्पूर्ण होने पर श्रीविष्णु जी एवं एकादशी माता की आरती करें। उपस्थित जनों में प्रसाद वितरित करें। ब्राह्मणों को दान दें। सारे दिन श्रीविष्णु भगवान का नाम जपें। सारी रात भगवान का कीर्तन एवं जागरण करें। अगली सुबह उठकर नित्य क्रम कर , स्नान करें एवं श्रीविष्णु जी का पूजन करें। ब्राह्मणोंको दान दें। तत्पश्चात् भोजन ग्रहण करें।